"तुम ही आना"
और ना आने का ग़म
फिर ज़माने का ग़म
क्या करें
राह देखे नज़र
रात भर जाग कर
पर तेरी तो खबर ना मिले
बहुत आयी गयी यादें
मगर इस बार तुम ही आना
इरादे फिर से जाने के नहीं लाना
तुम ही आना
आ..
कोई तो राह वो होगी
जो मेरे घर को आती है
करो पीछा सदाओं का
सुनो क्या कहना चाहती है
तुम आओगे मुझे मिलने
खबर ये भी तुम ही लाना
बहुत आयी गयी यादें
मगर इस बार तुम ही आना
मरजावाँ.
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